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कुछ मन की कुछ जग की
Wednesday, December 26, 2007
कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात: कोई समझा दे!
कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात: कोई समझा दे!
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात: कोई समझा दे!
आधे-अधूरे रिशते!
सम्पूर्णता!
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
दुश्मनों ने तो ज़ख्म देने ही थे, ये उनकी फितरत थी! दोस्तों ने भी जब दगा की, यह हमारी किस्मत थी!!
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